मितो जापान के नए प्रधानमंत्री योशिदे सुगा ने देश की कमान संभाल ली है। योशिहिदे सुगा को आने वाले समय में चीन समेत एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझना होगा। इनमें एक प्रमुख चुनौती यह भी है कि विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की प्रगति की रफ्तार को कैसे बरकरार रखा जाए क्योंकि इसकी आबादी बूढ़ी होने के साथ ही कम भी हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के मुख्य प्रवक्ता रहे सुगा को बुधवार को संसद ने प्रधानमंत्री निर्वाचित किया। आबे ने स्वास्थ्य कारणों से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सुगा ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जनता के लिए काम करने और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता जताई। जापान के लिए एक प्रमुख चुनौती यह है कि इसकी आबादी लगातार घट रही है और बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ रही है। देश में लगातार आठवें साल भी आबादी में कमी दर्ज की गई है और 2050 तक इसमें लगभग 40 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है। बूढ़ी होती आबादी भी देश के लिए चिंता का विषय है। सुगा के गृह क्षेत्र अकिता में एक तिहाई से अधिक आबादी 65 साल से अधिक उम्र की है और यहां 1950 के दशक से एक तिहाई से अधिक की कमी आई है। चीन के साथ तेजी से बढ़ रहा है जापान का तनाव चीन के साथ तनावपूर्ण संबंध भी प्रधानमंत्री के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। चीन की सेना लगातार जापानी कब्‍जे वाले द्वीपों के आसपास के इलाके में घुसपैठ कर रही है। इसी को देखते हुए जापान अपनी सेना को मजबूत करने में लगा हुआ है। पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर बढ़ते विवादों के बीच जापान हाइपरसोनिक एंटी शिप मिसाइल को बनाने की तैयारी कर रहा है। ये जापानी मिसाइल समुद्र में चीन के किसी भी प्रकार के हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगी। चीनी शिप में लगे रडार जब तक इस मिसाइल के बारे में पता लगाएंगे तबतक यह प्रलय बनकर उनके युद्धपोतों को डुबा देगी। कई अन्य ऐसे मुद्दे भी हैं जिनसे निपटने की कला प्रधानमंत्री के रूप में सुगा के सफल या विफल होने की कहानी बयां करेगी। द्वीपों को लेकर जापान से भिड़ा चीन चीन और जापान में पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर आपस में विवाद है। दोनों देश इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। वहीं, चीन का दावा है कि ये द्वीप उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जापान को अपना दावा छोड़ देना चाहिए। इतना ही नहीं चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तो इसपर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे चुकी है।


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