नई दिल्लीकन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) द्वारा बीते 10 जून से चलाए जा रहे चीनी सामान के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान "भारतीय सामान-हमारा अभिमान" को समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिलने लगा है। अब के आह्वान पर किसान, ट्रांसपोर्टर, लघु उद्यमी आदि के संगठनों ने चीनी सामान के बहिष्कार का समर्थन किया है। इनका कहना है कि वे एक तरफ़ चीनी उत्पादों के बहिष्कार और दूसरी तरफ "आत्मनिर्भर भारत" बनाने के लिए भारतीय सामानों के उत्पादन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करेंगे। मिला कई संगठनों का साथ कैट के साथ इस अभियान में जुड़ने वाले महत्वपूर्ण संगठनों में इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन, राष्ट्रीय किसान मंच, कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन,ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, एमएसएम ईडेवलपमेंट फोरम, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया कॉस्मेटिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट फ़ोरम, वुमन एंटरप्रीनियोर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया आदि शामिल हैं। इन सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से एक मंच के रूप में और अपने स्वयं के क्षेत्रों में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान का समर्थन और नेतृत्व करने का निर्णय लिया है। स्थानीय संसाधनों को दिया जाएगा बढ़ावा विभिन्न वर्गों के नेताओं ने सर्वसम्मति से कहा है कि चीन को जवाब देने के लिए स्थानीय संसाधनों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। इन्होंने एक स्वर में इसके प्रति प्रतिबद्दता ज़ाहिर करते हुए सभी ने कहा की चीनी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं के उपयोग को अब बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसा करके वह भारत में यह बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए कैट देश भर में अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, बुद्धिजीवियों के समूह आदि को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। अपने सामानों को दिया जाएगा बढ़ावा कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों ने एक साथ हाथ मिलाया है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत किसी भी तरह चीन पर निर्भर न रहे। साथ ही प्रतिस्पर्धी मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण सामानों के उत्पादन हम आत्मनिर्भर होंगे। इस देश में किसी चीज की कमी नहीं है। देश में पर्याप्त भूमि और कामगार संसाधन और तकनीक उपलब्ध है। इसका उपयोग अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घकालिक रणनीतिक नीति के तहत किया जाना चाहिए।


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