प्रेगनेंसी और बच्‍चे को जन्‍म देना मां की जिम्‍मेदारी होती है लेकिन प्रेगनेंसी के नौ महीनों में पुरुषों की भी कुछ जिम्‍मेदारियां होती हैं। प्रेगनेंसी के नौ महीनों में जहां महिलाएं शिशु की देखभाल करती हैं, वहीं पुरुषों को अपनी फीमेल पार्टनर का ख्‍याल रखना चाहिए।गर्भावस्‍था के दौरान पुरुषों की जिम्‍मेदारी होती है कि वो अपनी प्रेगनेंट वाइफ को खुश रखें। यहां हम आपको कुछ ऐसी चीजें बता रहे हैं जो हर पुरुष को अपनी प्रेगनेंट वाइफ के लिए करनी चाहिए।

गर्भावस्‍था के समय महिलाओं का शरीर बहुत कुछ सहन करता है। शिशु के बढ़ने की वजह से उनके लिए घर के कामकाज करना बहुत मुश्किल होता है। साफ-सफाई वाले प्रोडक्‍टस से

प्रेगनेंसी में मतली

हो सकती है इसलिए टॉयलेट, बाथरूम या किचन आदि साफ करने का काम पति को संभाल लेना चाहिए।

प्रेगनेंसी में झाडू और पोछा भी लगाना मुश्किल होता है इसलिए ये सब काम भी प्रेगनेंट वाइफ को न करने दें।

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बच्‍चा होने के बाद पति पत्‍नी की जिंदगी कभी भी पहले जैसा नहीं रहती है। पैरेंट्स बनने के बाद कम से कम कुछ सालों तक तो न आपको रात को रोमांटिक लान्‍ग ड्राइव पर जाने को मिलेगा और न ही वीकेंड पर ज्‍यादा एंजॉय कर पाएंगे।

इसलिए बेहतर होगा कि आप अभी ही अपनी स्‍पेशल यादें बनाना शुरू कर दें और इस समय को एंजॉय करने की कोशिश करें। अपनी वाइफ के साथ वॉक करें और उनके लिए रोमांटिक डिनर प्‍लान करें।

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प्रेगनेंसी में शरीर के अंदर हार्मोनल बदलाव बहुत होते हैं जिसकी वजह से महिलाएं भावनात्‍मक रूप से कमजोर या मूड स्विंग्‍स महसूस करती हैं। अपनी प्रेगनेंट वाइफ के लिए इस सफर को आसान आप बना सकते हैं।

उनसे पॉजीटिव बातें करें और नेगेटिविटी को दूर रखने की कोशिश करें। इस बात को समझें कि प्रेगनेंसी में ये सब होना नॉर्मल बात है और डिलीवरी के बाद इस तरह की चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी।

प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी फीमेल पार्टनर को भावनात्‍मक रूप से पूरा सहयोग देना है।

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सभी जानते हैं कि प्रेगनेंट महिलाओं को खाने की क्रेविंग (कुछ खाने का मन करना) होती है जिसे पूरा करना पति की जिम्‍मेदारी बनती है। अगर आपकी प्रेगनेंट वाइफ का अचार या नमक या कुछ भी ऐसा खाने का मन कर रहा है जो आपको अजीब लग रहा है, तो हैरान होने की जरूरत नहीं है।

क्रेविंग्‍स को लेकर कोई सवाल किए बिना उनकी पसंद की चीज लाकर रख दें और वो जो भी मांगती हैं, उसे पूरा करने की कोशिश करें। क्रेविंग पूरी करने से मां और बच्‍चा दोनों खुश रहते हैं।

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खासतौर पर पहली बार मां बनने पर महिलाओं को प्रेगनेंसी और डिलीवरी को लेकर ज्‍यादा चिंता रहती है। ऐसे में मेल पार्टनर को प्रेगनेंसी के सफर में आने वाली परेशानियों और चुनौतियों के बारे में पहले से ही थोड़ी जानकारी रख लेनी चाहिए।

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, ब्रेस्‍ट में बदलाव और न जाने किस किस बदलाव को लेकर महिलाएं परेशान रहती हैं। ऐसे में अपनी पार्टनर की बात सुनें और उनकी तकलीफ को कम करने की कोशिश करें। आपकी छोटी-सी भी कोशिश आपकी पार्टनर की तकलीफ को कम करने में मदद कर सकती है।

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