माना जाता है कि गर्भावस्था के नौवें महीने में घी खाने से नॉर्मल डिलीवरी होती है और मां एवं बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। घी और नॉर्मल डिलीवरी के बीच संबंध को लेकर विशेषज्ञों का क्या मानना है, आइए जानते हैं।घी में रेचक गुण होते हैं जो प्रसव लाने में मदद करते हैं। ये योनि को चिकना करने और फिर आराम से डिलीवरी करवाने का गुण रखता है। घी पाचन को दुरुस्त कर
से बचाता है। घी खाने से शिशु के मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा मिलता है। इससे प्रेगनेंट महिला का शरीर मजबूत, गर्म और पोषित रहता है।
यह भी पढें :
सिजेरियन ऑपरेशन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए करें ये काम
इस बात में कोई शक नहीं है कि घी खाने से सेहत को कई लाभ मिलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि घी खाने से
की गारंटी मिलती है। एक रिसर्च के मुताबिक, महिला के वजन के आधार पर
में 200 से 300 कैलोरी की जरूरत होती है।
यह भी पढें :
गर्भ में क्या-क्या करते हैं शिशु, जानकर उड़ जाएंगे आपके होश
चूंकि, हर महिला की प्रेगनेंसी और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए डॉक्टर ही आपको बता पाएंगे कि आपको कितनी कैलोरी की जरूरत है। घी में भी कैलोरी और फैट होता है, लेकिन इसके अधिक सेवन के कारण मोटापा हो सकता है इसलिए सीमित मात्रा में ही घी खाएं।
अगर आप ऐसा करती हैं तो डिलीवरी के बाद वजन घटाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी और आहार में अधिक घी लेने की वजह से मतली और कमजोरी महसूस हो सकती है।
यह भी पढें :
प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद झड़ते बालों को रोकने के उपाय
डॉक्टरों की मानें तो प्रेगनेंट महिलाओं को एक दिन में पांच से आठ चम्मच से ज्यादा टोटल फैट नहीं लेना चाहिए। हालांकि, डॉक्टर कुछ स्थितियों में फैट के सेवन की मात्रा में बदलाव कर सकते हैं। इन स्थितियों में मोटापा और पथरी होना शामिल है।
यह भी पढें :
प्रेगनेंसी में प्रदूषण की वजह से शिशु को होने वाले नुकसान
from Family Tips In Hindi , Women issues, Pregnancy Tips, baby care tips - फैमिली टिप्स, प्रेगनेंसी टिप्स | Navbharat Times https://ift.tt/2WVnVF3
0 Comments